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बेटियाँ कितनी असुरक्षित??? डॉ डी एम मिश्र

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हमारे मुल्क में औरतें सुरक्षित नहीं । कम उम्र की अबोध और नाबालिग लड़कियाँ तो कतई नहीं। हैवानियत चरम पर है । किसी को शासन -प्रशासन का डर नहीं । अँधेर नगरी - चौपट राजा की कहावत चर...

भाजपा सरकार और अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले

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अमन पठान डिजिटल इंडिया के इस युग में सोशल मीडिया पर प्रशंसा और आलोचना जमकर होती है। अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमला दो धर्मों के बीच बंटता हुआ नजर आ रहा है। एक ओर जहां सोशल मीडिया पर अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की निंदा की जा रही है और मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर सलीम की वीरता के कसीदे पढ़े जा रहे हैं। इस आतंकी हमले की निंदा के बीच में आतंकी संदीप शर्मा को भी घसीटकर ये बताने की कोशिश की जा रही है कि आतंकवाद का धर्म से कोई ताल्लुक नही होता है। इस हमले के बाद CPI (M) नेता सीताराम येचुरी ने ट्विटर के जरिए भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि कश्मीर में बीजेपी की सरकार के अंतर्गत राज्य के हालात लगातार बिगड़े हैं। इस हमले पिछली बार जब सन् 2000 में हमला हुआ था, तब भी बीजेपी की सरकार थी और अब 2017 में भी बीजेपी की ही सरकार है। बीजेपी की सरकार को इसका कोई हल निकालना चाहिए। हम इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। तो वहीं सोशल मीडिया से जुड़े लोग भाजपा सरकार से पूंछ रहे हैं कि अमरनाथ यात्री पर हमले तभी होते हैं जब भाजपा सरकार सत्ता में होती ...

अगर अमरनाथ यात्रियों को मारने वाले मुसलमान थे तो बचाने वाला भी मुसलमान था

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अमन पठान अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले में 7 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई। इस निंदनीय घटना के बाद सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट की बाढ़ आ गई। सबके निशाने पर आतंकवादी नही मुसलमान थे। मैं दावे के साथ तो कह नही कह सकता हमलावर आतंकी किस धर्म के थे, लेकिन ये दावे के साथ कह रहा हूँ कि अमरनाथ यात्रियों की जान बचाने वाला मुसलमान था। चलिए सोशल मीडिया पर पोस्ट हो रहीं पोस्ट से मान लेते हैं कि आतंकी मुसलमान थे तो आप यह भी जान लीजिए अगर अमरनाथ यात्रियों को मारने वाले मुसलमान थे तो उन्हें बचाने वाला भी सलीम मुसलमान ही था। आतंकवाद को धर्म से जोड़कर उसे कट्टरता के चश्मे से न देखें। आतंकवाद को कट्टर धार्मिकता के चश्में से देखने वालों को हर आतंकवादी मुसलमान ही नजर आता है। कल जम्मू कश्मीर पुलिस ने लश्कर के आतंकी संदीप शर्मा को जिंदा गिरफ्तार किया। कुछ मीडिया संस्थानों ने उसे हिन्दू आतंकी बताते हुए समाचार प्रकाशित किये। कट्टरवादियों को मीडिया की खबर इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने आतंकी संदीप शर्मा को मुसलमान साबित कर दिया। कुछ मीडिया संस्थान आतंकी संदीप शर्मा को हिन्दू मानने के लिए तैय...

क्या इतना ही जरूरी है अपने धर्म को ऊँचा दूसरे धर्म को नीचा समझना

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Nida Rahman की पोस्ट इतना मुश्किल तो नहीं है अपने मज़हब को मानते हुए दूसरे मज़हब की इज्ज़त करना । क्या ज़रूरी है कि खुद को और खुद के धर्म को अव्वल बताने के लिए किसी दूसरे के मज़हब को उनके देवी-देवताओं उनके महापुरुषों के बारे में गलत बातें की जाएं । इतना मुश्किल तो नही है ना कि हम सुकून से रहें । क्या ज़रूरी है कि कोई रसूलल्लाह को  गलत कहे, क्या ज़रूरी है कि हम किसी और की देवी देवताओं का मज़ाक उड़ाए। धर्म को मानने शर्त ये तो नहीं है ना कि किसी दूसरे धर्म को बुरा भला करें। आस्तिक नास्तिक होने की ये शर्त को कतई नहीं है ना। हम अपनी आस्था अपने विचारों के साथ चैन से रह सकते हैं ना । बंगाल में नाबालिग ने मोहम्मद साहब के बारे में भड़का पोस्ट लिख दी तो भाई लोग भड़क गए हैं । लीजिए एक खबर उत्तराखंड के गढ़वाल से आ रही है वहां किसी नाबालिग बच्चे ने केदारनाथ मंदिर की आपत्तिजनक फोटो पोस्ट कर दी है जिसके बाद बजरंगियों ने दुकान में आग लगा दी है । इससे हासिल को कुछ नहीं होगा, ये नौजवानों की नसों में धार्मिक उन्माद क्यो भर रहा है । सबसे ज़्यादा चिंता इसी बात की है कि नया खून ज़हरीली हो र...

जिसके पास दिल है वो ही इस लेख को पढ़े, मंदिर- मस्जिद की बात करने से पहले अगर हम निबालों की बात करें तो सुकून मिलेगा

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** प्रधान मंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी द्वारा काफी सुविधाएं चलाई जा रही हैं लेकिन किसी को राहत नही मिल रही। मंदिर मस्जिद के झगड़ो में लोग इंसांनीयत ही भूल रहे हैं । रोज सोशल साइट्स पर देखने को मिलता है कि हमे बाबरी मस्जिद चाहिये, या हमे राम मंदिर चाहिए, लेकिन कोई ये नही सोचता कि अपने देश में कितने लोग ऐसे हैं जिन्हें खाने तक को रोटी नही हैं, रहने को फर नही है।अब इन्हें क्या मतलब किसी मस्जिद से या किसी मंदिर से इन्हें जहां भी मिलता है वहां खा लेते हैं जहां रहने को मिलता है वहां रह लेते हैं।और वैसे भी पेट नही कहता कि ये दूसरे धर्म का खाना है मत खा। देश तो छोड़ो कपङे शहर को ही देख लिया जाए तो बहुत लोग मिल जाएंगे ऐसे।ऐसा ही नजारा आज सदर थाने के एरिया में देखने को मिला जहां कंपनी गार्डेन के सामने एक परिवार सड़क किनारे अपना जीवन बसर कर रहा है, उनके मासूम बच्चे जिन्हें अभी तक ठीक से दुनिया की समझ भी नही है , चलना तक ठीक से नही जानते वो भीख मांगने के लिए मजबूर हैं। अब गलती किसकी है इन बच्चों के भीख मांगने के पीछे, मा बाप की या किस्मत की या फिर किसी और कि। जहां एक तरफ चाइल्ड ल...

मोदी भक्ति से जीएसटी को मिल रही है शक्ति

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अमन पठान देश में मोदी भक्तो की संख्या लाखों में नही करोड़ों में है। यही कारण है कि पीएम मोदी के जन विरोधी फैसलों को भी जनहित में बताकर उनकी सराहना की जाती है। मेरी समझ में अब तक यह नही आया है कि जीएसटी से जनता का कौन सा भला होने वाला है जो भक्त जीएसटी को मोदी सरकार का जनहित में लिया गया फैसला बताकर ढिंढोरा पीट रहे हैं। जीएसटी के लागू होते ही होलसेल व्यापार में 70 फीसदी गिरावट आ गई। एक लाख कंपनियां बंद हो गईं। हजारों लोग बेरोजगार हो गई। कंपनियों ने फ़िलहाल अपना उत्पादन बंद कर रखा है। क्योंकि मोदी सरकार ने अभी तक उन्हें जीएसटी से जुड़े नियम कानून के दस्तावेज उन तक नही पहुंचाए हैं। इससे साबित होता कि मोदी सरकार ने नोटबंदी की तरह बिना तैयारी के जीएसटी को लागू किया है। खैर देश में जीएसटी लागू हो चुकी है। अब जो भी परेशानियां आएँगी उन्हें झेलना तो पड़ेगा ही, लेकिन लगभग यह तो तय है कि आने वाले समय में लोगों को तमाम असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है और जमाखोर मौज करेंगे। जीएसटी जनहित में नही बल्कि पूंजीपतियों के हित में है। हालांकि सरकार को राजस्व का तो इजाफा होगा, लेकिन फायदा पूंजीपतियों क...

और इस तरह आप झांक सकते हैं इंसान के अंदर

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विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक सुकरात, एक बार अपने शिष्यों के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे। तभी वहां अजीबो-गरीब वस्त्र पहने एक ज्योतिषी आ पहुंचा। वह सबका ध्यान अपनी ओ...

और इस तरह आप झांक सकते हैं इंसान के अंदर

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विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक सुकरात, एक बार अपने शिष्यों के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे। तभी वहां अजीबो-गरीब वस्त्र पहने एक ज्योतिषी आ पहुंचा। वह सबका ध्यान अपनी ओ...

बेटा तू तो मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की कहता था अब बता...

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मुसलमानों के हनुमान जी शीबा नकवी फेसबुक पर मेरा भी लिखा हुआ पढ़ती हैं, मैं और मेरी पत्नी वीणा हिमाचल से दिल्ली आये हुए हैं, दो दिन पहले शीबा हम लोगों से मिलने आयीं थीं, शीबा मानसिक रूप से कमज़ोर बच्चों को पढ़ाती हैं, शीबा बेहद मीठा बोलने वाली शांत सी महिला हैं, उन्होंने एक बहुत मजेदार किस्सा सुनाया, उन्होंने बताया कि एक बार उनकी कालोनी में लाऊडस्पीकर से आवाज़ आयी, एक बच्चा गुम हो गया था उसकी सूचना दी जा रही थी, रात का समय था, शीबा ने अपने बच्चों से कहा आओ हम सब दुआ करें कि मौला उस बच्चे को अपने माँ बाप से मिला दे, शीबा की बेटी ने कहा मम्मी आपने सुना नहीं वो बच्चा हिन्दू है मौला उसकी मदद कैसे करेंगे ? शीबा ने अचरज से अपने बच्चों से पूछा कि क्यों मौला उसकी मदद क्यों नहीं करेंगे ? शीबा की बेटी ने कहा उसकी मदद तो हनुमान करेंगे, शीबा ने कहा कोई बात नहीं मौला भी हिन्दू बच्चे की मदद कर सकते हैं, शीबा की बेटी ने पूछा क्या हनुमान हमारी मदद करेंगे ? शीबा ने कहा हाँ कर सकते हैं, सुनाते समय शीबा की आँखों में एक रोशनी थी, और मैं नास्तिक होते हुए भी नमी भरी आँखों से ...

मुसलमानों को देशद्रोही और आतंकी ऐसे कह देते हैं जैसे अनजानी लड़की को आई लव यू

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अमन पठान सब जानते हैं कि आतंकवाद का कोई मजहब नही होता है। आतंकवादी और देशद्रोही हर कौम की शक्ल में मिलते हैं। फिर भी मुसलमानों पर ही देशद्रोही और आतंकी की तोहमत लगाई जाती है। कुसूरवार वो नही हैं जो जरा जरा सी बात पर मुसलमानों को आतंकी, देशद्रोही करार दे देते हैं। असली कुसूरवार तो भारतीय मीडिया है जो तिल का तहाड़ बना देती है और मोदी सरकार बनने के बाद समाज में धर्म की नफरत घोलने का काम कर रही है। बीते कुछ माह पूर्व मध्य प्रदेश में दर्जन भर भगवा आतंकी पकडे गए थे। जो आईएसआई के लिए काम करते थे। भाजपा और बजरंग दल से जुड़े होने के प्रमाण मिले थे। भारतीय मीडिया के लिए ये खास खबर नही थी। इसलिए मीडिया ने औपचारिकता निभाई। भारतीय मीडिया की नजर में असली आतंकी तो मुसलमान होते हैं। जब कोई मुसलमान आतंकी गतिविधि में पकड़ा जाता है तो मीडिया मामले को सनसनीखेज बनाकर दिनभर हंगामा करती है। चाहें पकड़े गए आतंकवाद के आरोपी को पुलिस बलि का बकरा ही क्यों न बना रही हो। मीडिया उसका शिज़रा तक प्रकाशित कर डालती है। मीडिया आतंकवाद के आरोपी को आरोपी नही आतंकी कहती है जैसे मीडिया के संपादक न्यायाधीश हों। मुस्लिम कौम ...

जब मैं छोटा बच्चा था

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मैं उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले का रहने वाला हूं. अपने माता-पिता की पहली संतान होने के कारण बचपन से ही पूरे परिवार का दुलारा था. कहां जाता हूं, किसके साथ जाता हूं, जब तक नजर से दूर था तब तक क्या कर रहा था? ऐसे सवालों का सामना अमूमन सभी बच्चों करना होता है. मुझसे तो ये सवाल जरूर पूछे जाते थे. यह सब उस समय बड़ा नागवार गुज़रता था पर आज समझ आता है कि जिंदगी बनाने के लिए यह सब कितना जरूरी है. यह बात तब की है जब मेरी उम्र शायद 10-11 साल रही होगी. जैसा कि आमतौर परिवारों में होता है, हम भी गर्मी की छुट्टियों में मामा के घर जाते थे. इन दौरान मेरे दिल में उमंग की एक अनोखी लहर हुआ करती थी क्योंकि वहां सारा दिन बेरोक-टोक खेलना-कूदना होता था। अपने मामा के ही घर एक दफा मेरी मुलाकात दूर के मामा के बेटे से हुई. उनका नाम आसिफ था. वे मुझसे उम्र में तीन-चार साल बड़े थे इसलिए मैं उन्हें आसिफ भाई कहता था. वे भी अपने अम्मी-अब्बू के साथ वहां छुट्टियां मनाने आए हुए थे. कुछ ही समय में हमारी गहरी दोस्ती हो गई. इसके बाद आलम ये था कि साथ खेलना, साथ खाना और साथ घूमना. इसी दौरान एक दिन आसिफ भाई ने मुझे वीडियो गेम के ब...

भगवा आतंकियों की करतूतों पर मखमल के पर्दे डाल रही है मीडिया

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अमन पठान मध्य प्रदेश में एक दर्जन भगवा आतंकी (आईएसआई एजेंट) पकड़े गए और मीडिया की आँखों में मोतियाबिंद हो गया। भोपाल एनकाउंटर में मारे गए सिमी कार्यकर्ताओं की जन्म कुंडली छापने और दिखाने वाली मीडिया के मुंह पर अलीगढ़ के ताले क्यों लग गए हैं? क्या मीडिया को सिर्फ मुसलमानों को बदनाम करना ही आता है? भगवा आतंकियों की करतूतों पर मीडिया क्यों मखमल के पर्दे डाल रही है। आतंकवाद के आरोपियों को एमपी पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया। मीडिया ने मुल्जिम और मुजरिम में फर्क बताये बिना आतंकी करार दे दिया। सिर्फ एनडीटीवी ने भोपाल एनकाउंटर में मारे गए सिमी कार्यकर्ताओं को आतंकवाद के आरोपी बताया था। इसके बाद नाभा जेल ब्रेक हुआ और धर्म बदलते ही आतंकी मीडिया की नजर में आरोपी (अपराधी) हो गए। खैर आपका अख़बार है, आपका चैनल है। जो छापो जो दिखाओ आपकी मर्जी, लेकिन सच की हत्या तो मत करो? मध्य प्रदेश में पकड़े गए एक दर्जन पाकिस्तानी जासूस, आईएसआई एजेंटों और देश के गद्दारों को लेकर मीडिया क्यों खामोश है। अगर यही लोग मुसलमान होते तो मीडिया हलक फाड़ फाड़कर चिल्ला रही होती कि पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली? एक दर्जन आतंकी हुए गिरफ...

मीडिया को बस मुसलमानों को बदनाम करना आता है?

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अमन पठान मध्य प्रदेश में एक दर्जन भगवा आतंकी (आईएसआई एजेंट) पकड़े गए और मीडिया की आँखों में मोतियाबिंद हो गया। भोपाल एनकाउंटर में मारे गए सिमी कार्यकर्ताओं की जन्म कुंडली छापने और दिखाने वाली मीडिया के मुंह पर अलीगढ़ के ताले क्यों लग गए हैं? क्या मीडिया को सिर्फ मुसलमानों को बदनाम करना ही आता है? भगवा आतंकियों की करतूतों पर मीडिया क्यों मखमल के पर्दे डाल रही है। आतंकवाद के आरोपियों को एमपी पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया। मीडिया ने मुल्जिम और मुजरिम में फर्क बताये बिना आतंकी करार दे दिया। सिर्फ एनडीटीवी ने भोपाल एनकाउंटर में मारे गए सिमी कार्यकर्ताओं को आतंकवाद के आरोपी बताया था। इसके बाद नाभा जेल ब्रेक हुआ और धर्म बदलते ही आतंकी मीडिया की नजर में आरोपी (अपराधी) हो गए। खैर आपका अख़बार है, आपका चैनल है। जो छापो जो दिखाओ आपकी मर्जी, लेकिन सच की हत्या तो मत करो? मध्य प्रदेश में पकड़े गए एक दर्जन पाकिस्तानी जासूस, आईएसआई एजेंटों और देश के गद्दारों को लेकर मीडिया क्यों खामोश है। अगर यही लोग मुसलमान होते तो मीडिया हलक फाड़ फाड़कर चिल्ला रही होती कि पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली? एक दर्जन आतंकी हुए गिरफ...

अपना नेता चुन नहीं पा रहे, उम्मीदें लोगों से कर रहे कि वह उन्हें चुन लें!

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खान अशु चौदह बरस का वनवास काट चुके हैं, हालात यही रहे तो आगे भी पैवेलियन में बैठे तालियों ही ठोकते रहेंगे! वजह छिपी नहीं है, सरेआम है, सबकी अपनी महत्वाकांक्षाएं! एक राजा, तो दूसरा महाराजा, एक उचा तो दूसरा उससे भी कद्दावर! सबको ऊपर जाना है, सबको आगे, सबको गद्दी चाहिए और सबको राज करना है! कोशिशों को अन्जाम देने एक-दूसरे को नीचे दिखाने की इन्तेहा यह है कि दसों नेता मिलकर अपने लिए एक सर्वमान्य अगुआ ही नहीं चुन पा रहे हैं। भोपाल से दिल्ली तक दौड़ लग रही हैं लेकिन नतीजा बाबाजी का ठुल्लु। 'सबका साथ सबका विकास' का दावा करने वालों पर तन्ज कसने वाले खुद ही आदिवासी को पीछे धकेलने, मुस्लिमों को दरकिनार करने, ठाकुरों को तरजीह देने और ब्राह्मणों को आगे बढ़ाने का ओछाई दिखाने में कोताही नहीं कर रहे हैं। खुद के लिए अपने बीच से, अपनी ही पार्टी के एक नेता को चुन नहीं पा रहे हैं और उम्मीदें यह लगा रखी हैं कि प्रदेश की जनता उन्हें चुनकर अपना अगुआ बनाए! पुछल्ला घेराव विधानसभा का या अपने लोगों का? एक दिन बाद मप्र विधानसभा घेराव की तैयारी। बतौर-ए-खास जिन नेताओं की आमद होने की उम्मीद लगाई जा रही है, उन...

उम्मीद पर 'कांग्रेस' कायम है!

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खान अशु कभी भाजपा के दामन में रहे, उनके हर झूठ को राजनीतिक मन्च से लेकर अदालत तक सच साबित करने में लगे रहे और पार्टी के यशोगान करते रहने वाले सीनियर एडवोकेट रामजेठ मलानी कहते हैं कि मोदी सिर्फ बातें करते हैं, जिनका कोई औचित्य नहीं है! वकील साहब के अलावा कई और भी बीजेपी लीडर ऐसा ही राग अब अपनाए हुए हैं। महज ढाई तीन साल में बदले इन लोगों के सुर के पीछे कारणों की कमी नहीं है। सौराष्ट्र से दिल्ली के ताज तक पहुंचने के लिए शहन्शाह-ए-नरेन्द्र ने जो बलियाँ ली हैं, उसमें अपने-पराए के फर्क को भी दूर ही रखा है। पार्टी को पहचान देने से लेकर उसे स्थापित और स्वीकार्य बनाने में जिन लोगों का खून-पसीना लगा, को हाशिये पर बैठाने से लेकर देश को आर्थिक आपातकाल में धकेलने जैसे कटु फैसले लेकर मोदी सर्व निन्दनीय होते जा रहे हैं, गनीमत यह है कि जरखरीद मीडिया ने उनका बोलबाला और वर्चस्व कायम होने का दावा उठा रखा है। ढाई तीन साल में कुछ न कर पाने और इतने ही वक्त में होने वाली अगली अग्निपरीक्षा के लिए छटपटाते बड़बोले सरकार को अब सारी उम्मीदें राज्यसभा से हैं। पांच राज्यों के चुनावों की बैसाखी के सहारे अपनी ताकत मे...

खुलासा: गद्दारों की सरदार निकलीं सपा विधायिका जीनत खान, होनी चाहिए सपा से विदाई

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अमन पठान कासगंज। सीएम अखिलेश यादव ने अपनी आस्तीन में पटियाली सपा विधायक नजीबा खान उर्फ़ जीनत जैसे जहरीले सांप पाल रखे हैं। जो मौका मिलते ही डसने से नही चूकते हैं। पटियाली विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी किरण यादव को हराने के लिए सपा विधायक जीनत खान ने कोई कसर बाकी नही छोड़ी है। सपा विधायक ने गनेशपुर में एक गोपनीय बैठक कर बसपा प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया और लोगों को सीएम अखिलेश की रैली में जाने से भी रोक दिया। इसका खुलासा एक ऑडियो टेप से हुआ है। 2012 में जीनत खान पहली बार पटियाली से विधायक बनी और शिवपाल सिंह यादव की करीबी हैं, लेकिन क्षेत्र में विरोध होने के चलते उनका टिकट कट गया। शिवपाल गुट की ओर से जीनत खान की बेटी नाशी खान को पटियाली विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया और अखिलेश यादव ने आईजी अंशुमान यादव की पत्नी किरण यादव को उम्मीदवार बनाया। अखिलेश के फैसले के बाद सबके फैसले धरासाई हो गए। टिकट कटने की बौखलाहट जीनत खान के चेहरे से साफ झलकने लगी और सपा प्रत्याशी किरण यादव को हराने की कसम खा ली। जीनत खान खुद चुनाव मैदान में नही आईं, लेकिन सपा प्रत्याशी को हराने की पूरी साजिश रच डाली...

काश भ्रष्टाचारियों का मुंह काला करने के अधिकार नागरिकों के पास होता?

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भोपाल। बीत गए सात दशक फिर भी यह जनजातियों का क्यों नहीं हो पाया उद्धार जातिगत आधार पर दल राजनीति से तात्पर्य अनुसूचित जाति, जनजाति, दलित, पिछड़ा वर्ग ही देश में भरमार जो है लगभग 75% जनसंख्या के पार ! जातिगत राजनीति के मसीहा तुम बोलो लालू, मुलायम, नीतीश और माया के राज पाठ में तो अपरंपार जिसके कार्यकाल में फैला था मायाजाल ! हां यह सत्य ही नहीं कड़वा सत्य है सत्य है सत्य है सत्य बोलो सत्य है कि चपरासी से लेकर क्यों न हो बड़ा अधिकारी नेता सब के सब भ्रष्ट माया के साम्राज्य में माया का बोलबाला जिसके तहत 28 मंत्री हुए थे बाहर !       सात दशक बाद भी अनुसूचित जाति, जन जाति, दलित, पिछड़ावर्ग का नहीं हुआ विकास ! उनको समुचित अधिकार दिलाने, जातिगत राजनीति से हुआ देश का बंटाधार!फिर भी देखो जातिगत राजनीति करने वाले भरते हैं हूंकार की अनुसूचित जाति, जनजाति, दलित, पिछड़े वर्गों को मान-सम्मान दिलाएंगे फिर इनकी सरकार बनी तो पिछले कार्यकाल की भ्रष्ट नीतियां नहीं अपनाएंगे !       दूसरी तरफ भी देखता हूं मैं एक शेयर ब्रोकर जो सांठगांठ कर अपना हर क्षेत्र में ऐसा क्या कर जाता है जो...

अब कितना और दबाओगे सरकार!

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खान अशु  कल कह रहे थे कि हम रजवाड़े नहीं, जो कोई भी हमारे करीब ना आ सके, हम जमीनी लोगों के साथ कोई भी फोटो सेशन करवा लेता है। लेकिन अब ऐसा क्या हुआ कि तस्वीर 'चोर की दाढि में तिनका' के माहौल में बदल गई! खिसियानी बिल्ली खम्भा ना नोचे तो क्या करे! अभिव्यक्ति की आजादी का दमन करने में कोई गुरेज नहीं किया गया। आईएसआई एजेंटों से ताल्लुक रखने वाले तथाकथित भाजपाइयों के खिलाफ नारेबाजी करने वाले कांग्रेसियों को इन्दोरी भिया के लोगों ने दौड़ा-दौड़ाकर मारा। सुरक्षा की जिम्मेदारी रखने वाले पुलिस थाने के लोग भी इस तमाशे के गवाह बने, किसी को रोकने की न तो जुर्रत की, न ही जरुरत समझी। मप्र की व्यवसायिक राजधानी इन्दोर में हुआ यह किस्सा पहला नहीं है, चन्द दिनों पहले राजधानी भोपाल में भी ऐसा दमनचक्र घूम चुका है। विपक्ष की भूमिका से हमेशा अनजान रहे बेचारे कांग्रेसियों को कभी-कभार ही तो विरोध, प्रदर्शन, धरनो, नारेबाजियो की सलाहियत होती है, उनके इस अधिकार को भी इस तरह छीन लिया जाना कहाँ की चरित्रवादी परम्परा है सरकार, यह चाल तो दमनकारी है, इससे चेहरा धूमिल हुए बिना कैसे रह पाएगा? आप चलते नोट बन्द कर ...

इस सपा नेता ने खून से खत लिखकर दिखाया समाजवादी प्रेम तो अखिलेश का हुआ निगाह-ए-करम

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अमन पठान कासगंज। जिले के एक युवा सपा नेता ने बीते दिनों अपने खून से सीएम अखिलेश यादव के नाम खत लिया था और अमर सिंह को पार्टी से बाहर किये जाने की मांग की थी और समाजवादी परिवार में मचे घमासान के दौरान अखिलेश यादव का समर्थन करते हुए प्रदर्शन भी किया था। सपा नेता अभय यादव पर सीएम अखिलेश का निगाहे करम हो चुका है। कासगंज के अशोक नगर निवासी अभय यादव सपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। समाजवादी परिवार में मचे घमासान के दौरान अभय ने युवजन सभा के प्रदेश सचिव के पद से त्याग पत्र देकर अखिलेश यादव का समर्थन किया था और पानी की टंकी पर चढ़कर अखिलेश यादव के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया था। बीते दिनों अखिलेश यादव के समर्थन में खून से खत लिखकर अमर सिंह को पार्टी से बाहर किये जाने की मांग की थी। अखिलेश यादव के निर्देश पर अभय यादव को मुलायम सिंह यादव युथ बिर्गेड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य नामित किया गया है। यूथ बिग्रेड का सदस्य नामित किये जाने पर प्रमोद मिश्रा, संदीप यादव ,भक्ति चंडोक, डॉ.चमन अली , राजेंद्र कुशवाह, मुस्लिम खाँ , अमित गुप्ता , अर्पित मिश्रा, गोविन्द , अंशुमान, मयंक , सौरभ यादव , सुशील ...