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गाँधीगिरी पार्ट 2: सत्ता के गलियारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहेंगे?

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मोहम्मद जाहिद एक विनम्र तरीके से भी आप दुनियाँ को हिला सकते हैं:-महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) जरूरी नहीं की सत्ता पर असीन राजनेताओं की कुंभकर्णीय नींद तोड़ने के लिए इंकलाबी आंदोलन ही एक मात्र रास्ता हो। बहोत हद तक गाँधीवादी आंदोलनों की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है। हमारी आपकी , हम सबकी , एक "काली पट्टी" मुहिम मात्र ने उनकी आँखों पर पड़ी काली पट्टी को खोलने का काम किया है। यानि कि हमारी आपकी गाँधीवादी मुहिम #EidWithBlackBand कारगर साबित हुई थी। दुनिया तक आवाज़ पहुँची , दुनिया का ध्यान हमारे आपके ऊपर हुए ज़ुल्म की तरफ खिंचा , दुनिया हिली , देश हिला , सरकार हिली और सबसे बड़ी बात प्रधानमंत्री मोदी जी की ज़बान हिली। हर बार चुपचाप सबकुछ देखते रहने से अच्छा था कि हमसे जितना बन सका उतना करके सरकार को दिखा दिया कि नहीं हमारे अंदर की गैरत अभी ज़िंदा है। आप हमारे दिलों में भले ही ये वसवसा डाल चुके हैं कि हमारे आंदोलन अराजक हो जाया करते हैं लिहाज़ा हम सड़कों पर उतरकर एहतेजाज करने से कतराने लगे थे। लेकिन हमने इस तरफ़ कभी ध्यान ही नहीं दिया कि हम गाँधीवादी तरीके से भी एक बड़ा एहतेजाज कर सक...

जीएसटी से सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा के फाइनेंसर को हुआ है, बिलबिला रहे हैं पर चुप हैं?

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मोहम्मद जाहिद जीएसटी से सबसे अधिक नुकसान भाजपा और संघ के कैडर वोटर और फाइनेंसर को है , दरअसल वही बिलबिला रहे हैं पर चुप हैं। जीएसटी पर सबसे अधिक चिल्ला रहा है मुसलमान जिसकी 99% आबादी जीएसटी से लगभग अप्रभावित होगी। मुसलामानों को बस वही प्रभाव पड़ेगा जो जीएसटी की दर प्रभावित करेगी। परन्तु , संघ और भाजपा के फाइनेंसरों , कैडर और वोटरों की एक बहुत बड़ी पूँजी डूब रही है , नोटबंदी में भी डूबी। पर वह चुप हैं , वह मोदी का ना तो मज़ाक उड़ा रहे हैं ना विरोध कर रहे हैं। मोदी के सारे कामों के विरोध की जिम्मेदारी केवल और केवल मुसलमानों की है और यही मोदी विरोध संघ और भाजपा के नाराज़ वोटरों को एक कर देती है। नोटबंदी के बाद की तो जीएसटी के बाद भी करेगी। समझना होगा यह बात , कल किसी एक बहुत बड़े नेता की यह बात मेरे भेजे में घूस गयी ।

एक जानवर की जान एक इंसान की जान से ज्यादा कीमती कैसे हो सकती है ?

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वसीम अकरम त्यागी जुनैद इसलिये मार दिया गया क्योंकि वो ट्रेन में लड़की छेड़ रहा था। पहलू खान इसलिये मार दिया क्योंकि वह तस्करी के लिये गाय ला रहा था। अखलाक इसलिये मार दिया क्योंकि उसके फ्रिज में गोमांस था। 12 साल का मजलूम अंसारी और उसका चाचा इसलिये मार दिये गये क्योंकि वे काटने के लिये गाय ले जा रहे थे। झारखंड के 18 लोग इसलिये मार दिये क्योंकि वे बच्चा चुरा रहे थे। बंगाल के तीन लोग और गुहाटी के दो लोग इसलिये मार दिये क्योंकि वे गाय चुरा रहे थे। उस्मान को बेरहमी से पीटकर उसका घर इसलिये जला दिया गया क्योंकि उसने अपनी ही गाय की हत्या की थी। अलीमुद्दीन को इसलिये मार दिया क्योंकि वह गौमांस लेकर जा रहा था। ऐसे कुतर्क उन लोगों की तरफ से आते हैं जिन्हें इन हत्याओं का जरा भी मलाल नहीं, बल्कि वे इन हत्याओं के पक्ष में ऐसे कुतर्क और झूठ फैलाते हुऐ मिलते हैं। हर एक हत्या का उनके पास कुतर्क है अखलाक से लेकर अलीमुद्दीन तक उन्हें हर हत्या से प्यार है नफरत नहीं। इन्हें न तो कानून से मतलब है और मानवीय मूल्यों से इन्हें इससे भी मतलब नहीं कि एक जानवर की जान एक इंसान की जान से ज्यादा कीमती कैसे हो सकती है ...

‘जब नफ़रत राज करती है, तो मासूमियत की मौत हो जाती है’

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रेणुका शहाणे  भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या के विरोध में 28 जून को देश भर में प्रदर्शन हुए, उसी दिन अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने अपने फेसबुक वॉल पर यह पोस्ट लिखी. मेरे नाम पर नहीं बेरहम लोगों की एक हिंसक भीड़ ने जुनैद की हत्या कर दी. मुझे इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि क़ातिल किस धर्म को मानते थे, न ही मुझे इस बात की चिंता है कि जुनैद का मज़हब क्या था. मुझे सिर्फ़ एक बात की फ़िक्र है…वह यह है कि बेदर्द मनुष्यों के एक समूह ने हमला करके, एक किशोर की बेरहमी से हत्या कर दी और तीन अन्य नौजवानों को बुरी तरह घायल कर दिया! जुनैद, 16 साल का था… अगले साल मेरा बड़ा बेटा 16 साल का हो जाएगा… मैं जुनैद की मां के लिए मेरा दिल टूट रहा है. न केवल जुनैद को कुछ वहशियों ने मार डाला, बल्कि एक जनसमूह खड़ा उन्हें यह सब करते देखता रहा. जुनैद के हत्यारे वह निर्मम लोग भी हैं, जो खड़े हो कर यह तमाशा देखते रहे और चुप्पी साधे रहे. यहां कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो भीड़ द्वारा इस हत्या को तर्कसंगत ठहरा रहे हैं. जी हां, नफ़रत हर तरह के तर्क ढूंढ लाती है. अब इस तरह की हत्याओं की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है. यह इतनी मा...

आज़म खाँ के मुँह में जो आता है उसे बोल जाते हैं और हमेशा आरोपों से घिरे रहते हैं?

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देहात में एक कहावत कहते हैं कि -"जाति स्वाभाव कबौ नहि छूटै कुकुर टांग उठायकै - ---"। जिस मनुष्य का जो स्वाभाविक होता है उसमें कभी जल्दी परिवर्तन नहीं होता है और वह अपने स्वाभाविक के अनुकूल ही कार्य व्यवहार करता है।कुछ लोग ऐसे बेहया होते हैं जिनके ऊपर किसी के कहने का कोई फर्क या कोई शर्म लिहाज नहीं होती है।राजनीति में अबतक अन्य विषयों को लेकर राजनीति की जाती थी लेकिन कभी देश की एकता अखंडता और फौज के मनोबल को नहीं गिराया जाता था।इधर हमारी राजनीति कुछ ऐसे मोड़ पर आ गयी हैं जहाँ पर न तो राष्ट्रप्रेम है और न ही फौज के प्रति सम्मान ही शेष बचा है। वर्तमान राजनीति में कुछ राजनेता ऐसे निकले हैं जिनके लिये राजनीति और सत्ता ही सबकुछ है।ऐसे ही राजनेताओं ने सत्ता के लिये देशप्रेम एकता अखंडता सबकुछ दाँव पर लगा दिया है।इन्हीं राजनेताओं की राजनीति की देन है कि समाज की कौमी एकता समाजिक समरसता साम्प्रदायिक सौहार्द सबकुछ छिन्न भिन्न हो रहा है।जातीय साम्प्रदायिक व पारिवारिक हिंसा होने लगी है।उत्तर प्रदेश में सपा के बहुचर्चित कद्दावर नेता माने जाने वाले आजम खाँ अपने साम्प्रदायिक व ऊलूल जलूल बयानब...

तो क्या जीएसटी की जिद्द में भाजपा का वोट बैंक बिखर जाएगा?

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एसपी मित्तल 30 जून को दिन भर न्यूज चैनलों पर मोदी सरकार के मंत्री जीएसटी के फायदे गिनाते रहे तो वहीं देशभर में व्यापारियों विरोध करते देखा गया। अजमेर सहित देश के कई शहरों में बंद भी रहा। नरेन्द्र मोदी माने या नहीं, लेकिन आमतौर पर भाजपा को व्यापारी वर्ग की पार्टी माना जाता है। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि व्यापारी चुनाव में भाजपा का समर्थन करता है। लेकिन आज सबसे ज्यादा व्यापारी वर्ग ही जीएसटी के खिलाफ है। यदि इतने बड़े समूह का गुस्सा बना रहा तो चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है। हालांकि मोदी कई बार कह चुके हैं कि उन्हें चुनाव की हार से कोई फर्क नहीं पड़ता। देश को सुधारने और आगे ले जाने के लिए वे हर काम करेंगे। मोदी ने गत वर्ष नवम्बर में जब नोटबंदी की थी, तब भी माहौल बिगड़ा हुआ नजर आ रहा था। लेकिन तीन माह पहले हुए यूपी सहित चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जो सफलता मिली, उससे जाहिर है कि आम मतदाता मोदी की नीतियों से खुश है। एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद नरेन्द्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने हैं। यदि गुजरात में भाजपा की जीत होती है तो फिर यही ...

देश को बहुत महंगी पड़ी ‘मोदी की नोटबंदी’

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नोटबंदी फिर से चर्चा में है और यह कोई शुभ समाचार नहीं है। इससे लेन-देन के समूचे आकार में कमी आए, आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होंई; दुष्प्रभाव काफी लंबे समय तक जारी रहेंगे और 2017-18 की प्रथम तिमाही तथा शायद उससे भी अधिक समय तक अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा होगा। अब समय आ गया है कि नोटबंदी जिन लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकी और जो कुछ इसने किया है और जो प्रभाव अभी तक जारी हैं उनका लेखा-जोखा किया जाए। सर्वप्रथम तो नोटबंदी से काले धन का प्रवाह रुका नहीं है और न ही काली कमाई बाधित हुई है। चूंकि नोटबंदी ने इन समस्याओं को संबोधित ही नहीं किया इसलिए यह माना जा सकता है कि इसका इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। परिणाम यह हुआ कि जनवरी 2017 के बाद सब कुछ पहले की तरह चलने लगा। दूसरी बात यह हुई कि इसने करंसी की जालसाजी भी नहीं रोकी। भारतीय रिजर्व बैंक अभी भी उस पैसे की गिनती कर रहा है जो नोटबंदी दौरान बैंकों में आया था इसलिए जाली नोटों के संबंध में किसी प्रकार के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन अंदाजा लगाया गया है कि जाली नोटों की प्रतिशत बहुत ही मामूली है। कुछ भी हो, जाली करंसी तैयार करने व...

मोदी की गौरक्षकों से की गई अपील बेअसर

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जिस दिन प्रधानमंत्री ने बयान दिया कि गाय और गोरक्षा के नाम पर किसी को क़ानून हाथ में लेने का हक़ नहीं है, उसी दिन झारखंड में एक और व्यक्ति की गाय के नाम पर हत्या कर दी गई. कृष्णकांत झारखंड के रामगढ़ एक गोमांस ले जाने के शक में भीड़ ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी और उसकी वैन को आग लगा दी. भीड़ द्वारा किसी को भी पीट-पीट कर मार देने की बढ़ती घटनाओं के विरोध में 28 जून को देश भर के कई शहरों में प्रदर्शन हुए. इसके अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने बयान दिया कि गाय के नाम किसी भी इंसान को क़ानून हाथ में लेने का हक़ नहीं है. ऊना में मरी गाय की खाल उतारने वाले दलित युवकों की पिटाई के बाद भी प्रधानमंत्री ने बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 80 प्रतिशत गोरक्षक फ़र्ज़ी हैं. सरकारों को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए. प्रधानमंत्री को दो बार गोरक्षकों पर बयान दे चुके हैं, लेकिन लगता नहीं है कि प्रधानमंत्री की बात को गोरक्षा दल के गुंडे सुनने को तैयार हैं. जब प्रधानमंत्री ने यह बयान दिया, उसी दिन झारखंड में एक और व्यक्ति की गाय के नाम पर हत्या कर दी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा था कि गोरक...

दर्द जनता का, तडप मुनाफ़ाखोरो की!

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खान अशु मोरार जी देसाई की सरकार में जब शकर 2 ₹ किलो हुआ करती थी, इस्तेमाल करने वाले खरीदी में सोच-विचार नहीं किया करते थे, अब मोदी जी के युग में 40 की शकर भी जरूरत को नहीं डिगा पाई है... कार से लेकर पेट्रोल तक की कीमतों में भी इजाफा दर इजाफा हुआ, आम इंसान की जरूरत की हर चीज़ के हालात भी कमोबेश यही हैं, लेकिन इस्तेमाल करने वाले कम होने की बजाए लगातार बढ़ते ही गए... व्यापार बढ़ा, व्यापारी भी बढ़े... इतने बढ़े कि सरकारें बनाने और गिराने की ताकत पा गए... मानसूनी महीने के आखिरी दिन 30 जून को जिस कुनबे ने देश बन्द का ऐलान किया है, वह वही व्यापारी जमात है, जिसे उस पार्टी का संबल माना जाता है, जो वर्तमान में देश की अगुआ बनी हुई है। जिद और जबरदस्ती उस कानून को लेकर है, जो सरकार कल रात घण्टा बजाकर लागू करने वाली है। नए कानून से व्यापारी-कारोबारी इसलिए कम प्रभावित माना जाना चाहिए कि वह हमेशा से अपने मुनाफे के साथ ही धन्धा करता आया है, जिस लागत पर बनाया या जिस दाम पर खरीदा, उसमें फायदे का तडका लगाकर ही बेचता रहा है, फिर यह छटपटाहट क्यों? नए कानून को लेकर सही मायने में किसी को नाराज होना चाहिए तो व...

मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अपने स्वागत के लिए खर्च करवा दिये 70 करोड़

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रवीश कुमार एक राजनेता अपनी कामयाबी के शिखर दिनों के दौरान किस तरह की संस्कृति गढ़ता है, उसे उस समाज के लिए तो सोचना ही चाहिए जहां से वो आता है। राजकोट से दिल्ली आ गए प्रधानमंत्री को एक बार सोचना चाहिए कि नौ किमी के उनके रोड शो के बहाने यात्रा मार्ग को सजाने में जो ख़र्च किया गया है, क्या वो इस साधारण मुल्क के लिए वाजिब था? क्या प्रधानमंत्री की यात्रा की तैयारी को लेकर पारदर्शिता नहीं होनी चाहिए? क्या जनता को नहीं बताना चाहिए कि कौन कौन सी एजेंसियों ने पैसे खर्च किये, जिन लोगों ने अपने स्तर पर ख़र्च किये उनका हिसाब क्या है ताकि नौ किमी सड़क की सजवाट का वास्तविक ख़र्च हम जान सकें और अनुमान लगाने से बचें कि 20 से 70 करोड़ रूपये ख़र्च हुए हैं। 9 किमी की सड़क की सुरक्षा भी कम चुनौती नहीं होगी। प्रधानमंत्री की सभा है, ज़ाहिर है तैयारियां भी उसी स्तर की होती होंगी। एक रैली की सभा के लिए कितने सुरक्षा कर्मी लगेंगे और 9 किमी के रोड शो के लिए कितने। इसका ख़र्चा न तो कोई जानता है और न जान पायेगा। क्या सादगी और शुचिता की बात करने वाले प्रधानमंत्री को इतने महंगे और भव्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेना ...

क्या 'अखिलेश' में आज़म को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का साहस है ?

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सूर्य प्रताप सिंह आज़म ख़ान ने भारत की देशभक्त सेना को 'बलात्कारी' कहा.... पाकिस्तानी (महिला) आतंकवादियों द्वारा कश्मीर में शहीद होने वाले जवानों के 'प्राइवेट-पार्टस' को म्यूटिलेट( काटने) करने को सही ठहराया। इस खल ने पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में प्रायोजित आतंकवाद से जूझते हुए बहादुर सैनिकों का मनोबल तोड़ने का जघन्य अपराध किया है। यह दुष्कृत्य हमारे 'दुश्मन' देश 'नापाक' पाकिस्तान की हिमायत कर क़ानूनी तौर पर देशद्रोह की परिधि में आता है। यह अक्सर देखा गया है कि जब भी प्रधानमंत्री मोदी विदेश में पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरते हैं, यह 'अधम' आज़म ख़ान ऐसे ही पाकिस्तान समर्थक निकृष्ट बयान देता है। इसने सारे रामपुर में वक़्फ़ की ज़मीन/ ग़रीबों की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा किया हुआ है। राज्य सरकार को तत्काल इस दुरात्मा के ख़िलाफ़ अविलंब करवाई करनी चाहिए। आज़म ख़ान एक देशद्रोही राजनीतिक scoundrel (लुच्चा-लफ़ंगा) है ... इसने शहीदों के दुःखीमन माता-पिता/ परिजनों का अपमान किया है। आप ही बताएँ, सेना को प्रेम व सम्मान देने वाले सारे देशभक्तों के अपमान की इस 'क्षुद्...

शायद इस बार राष्ट्रीय ध्वज को 'सलाम' करने वाला 'उपराष्ट्रपति' मिल जाए

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सूर्य प्रताप सिंह उपराष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा हो गयी है। वर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा 'प्रोटोकोल' की आवश्यकता न होने के 'बहाने'(Excuse) से राष्ट्रीय झंडे को सलामी देना गवारा नहीं .... शायद 'राष्ट्र' से पहले मुल्ला-मौलवियों के डर वाला 'धर्म' आगे आ जाता है.... फ़तवा न जारी हो जाए। शपथ लेते समय संविधान पालन की सौगंध खायी जाती है ...उस समय क्यों मना नहीं किया था, शायद उपराष्ट्रपति भी नहीं बनते। इस देश में रहकर ही ये सब करने की स्वतंत्रता है।  इस देश का नमक खाना है, पद भी पाना है, हर चीज़ पर हक़ जताना है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज को सलाम करने और भारत माँ की जय बोलने पर मुल्ला-मौलवियों के फ़तवे से डर लगता है..... राष्ट्र धर्म व माँ भारती की बात करो तो कुछ और मतलब निकला जाता है। यदि राष्ट्र के प्रति प्रेम हो तो राष्ट्रीय ध्वज को सलाम करना दिल से आएगा.....प्रोटोकोल बाधा नहीं बनेगा। 'Nation First' (राष्ट्र सर्वोपरि) के सिद्धांत के पालन से ही अमेरिका आज नम्बर-१ देश है..... (लेखक पूर्व आईएएस अधिकारी हैं)

त्यौहार के तोहफे में मिली लाशें

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मोहम्मद जाहिद यह हमारा दुर्भाग्य है कि "कौम" के लिए लड़ाई लड़ने के लिए कौम के अंदर के ही कुछ लोगों का विरोध और गालियाँ सबसे पहले सुनने को मिलती है , देश की व्यवस्था से लड़ने के पहले इनसे लड़ना पड़ता है। #EidWithBlackBand की सफलता के बाद कुछ ऐसे लोग जिनसे प्रारंभ में इस मुहिम में शामिल होने की प्रार्थना करने पर उनका इन्कार और फिर बाद में मुहिम का मज़ाक इन्हीं द्वारा उड़ाया गया (सबूत है) और मुहिम के सफल होते देख मुहिम को अपने व्यक्तिगत और अपने किसी संगठन के लाभ के लिए हाइजैक करने का जो असफल प्रयास किया गया वह बेहद निन्दनीय है। इससे हम सबकी मिलकर एक होकर लड़ी जा रही लड़ाई में कुछ विवाद आया। फिर मुझे और इमरान भाई पर भद्दी पोस्ट की गयीं और सो काल्ड "चारमीनारी सम्राट" के लोगों ने हम दोनों को भद्दी भद्दी गालियाँ दीं। यहाँ तक की मेरी मौत पर लगातार घोषणाएँ कीं। जो लोग पहले इस मुहिम में शामिल होने से इन्कार इसलिए कर रहे थे कि इस तरीके से यह लड़ाई "हिन्दू वर्सेस मुस्लिम" हो जाएगी , वह लोग इस सफल मुहिम में अब अपने संगठन को माइलेज दिलाने के लिए प्रोग्राम करा रहे हैं। स...

इंसाफ की आवाज उठाने वाले इस मुसलमान हो बताया जा रहा है आईएसआई एजेंट

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इनका नाम है मुस्तक़ीम सिद्दीकी । झारखंड में रहते हैं लेकिन भीड़ और प्रशासन के हाथों हिंसा एवं अन्याय के शिकार लोगों के लिए पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार तक पहुंच जाते हैं। इंसाफ इण्डिया के नाम से इनका कैम्पेन चलता है। यह कैम्पेन वह पूरे साल चलाते हैं। कभी सांप्रदायिक हिंसा के शिकार मुसलमानों तो कभी जातिवाद के नाम पर अन्याय झेल रहे आम जन के दर्द में सहभागी बनते हैं। हाल ही में जमशेदपुर पुलिस ने इन पर तथा इनके अन्य साथियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मुस्तक़ीम चूंकि मुसलमान हैं तो उन्हें हिंदुस्तान अख़बार ने आईएसआई से रिश्ता रखने का अंदेशा जताया बाकि के साथी हिंदू हैं तो उन्हें नक्सली। अख़बार ने पुलिस की ज़ुबान बोली। मुस्तक़ीम कभी बाइक से तो कभी ट्रेन की जनरल बोगी में फर्श पर बैठ कर जनता के लिए संघर्ष करने निकल पड़ते हैं। एक बार बाइक पंक्चर हो गई तो बेचारे कई किमी पैदल खींच कर लाए क्योंकि जहां पंक्चर हुई वहां जंगल था। न्याय दिलाने का कार्य राज्य सरकारों का है, परंतु यह कार्य मुस्तक़ीम कर रहे हैं फिर भी मुस्तक़ीम विद्रोही हैं। ऐसा झारखंड पुलिस कहती है। मुस्तक़ीम सुदूर गाँवों में रह...

योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धी, उत्तर प्रदेश बन रहा है हत्या प्रदेश

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एक तरफ योगी सरकार सौ दिन पूरे होने पर अपनी सरकार की उपलब्धियाँ गिना रही है वहीं अपराधी भी सौ दिन की सरकार में अपनी उपलब्धियाँ गिनाकर योगी सरकार को कटघरे में खड़ा रहे हैं।योगी जी के लाख प्रयासों के बावजूद अपराधियों और अपराधिक घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।एक के बाद एक हो रही घटनाओं के आगे सरकार द्वारा सौ दिनों में किये गये तमाम कल्याणकारी कार्य पीछे हो गये हैं । रायबरेली जिले के ऊँचाहार क्षेत्र के इटोरा बुजुर्ग गाँव में सोमवार की रात प्रधानी चुनाव को लेकर पाँच लोगों की नृशंस सामूहिक हत्या पीटकर व जिन्दा जलाकर कर दी गयी।मूलरूप से प्रतापगढ़ के संग्राम गढ़ थाना क्षेत्र अन्तर्गत देवरा गाँव के पूर्व प्रधान रोहित शुक्ल अपने भाई देवाशीष शुक्ल की ससुराल इटोरा बुजुर्ग में प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।यह बात इटोरा बुजुर्ग के वर्तमान प्रधान राजा यादव उर्फ विजयबहादुर यादव को अच्छी नहीं लग रही थी और इसी बात को लेकर दोनों मे रंजित चल रही थी।सोमवार की रात करीब आठ बजे रोहित शुक्ल अपने साथियों के साथ प्रधान के गाँव सफारी कार से गया था। कहते हैं कि वहाँ पर दोनों पक्षों में तूल तकरार और ...

‘किसानों की क़र्ज़ माफ़ी से अर्थव्यवस्था बिगड़ती है, माल्या जैसों का अरबों माफ़ करने से संवरती है’

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सरकार को इसपर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि अगर हम अपना कृषि क्षेत्र नहीं बचा पाए तो अर्थव्यवस्था भी नहीं बचा पाएंगे. देविंदर शर्मा  हमारे यहां बहुत सारे लोग यह मानते हैं कि अभी कुछ महीने में कुछ हुआ है कि किसानों की समस्या बढ़ गई. मध्य प्रदेश में जो गोलीबारी हुई या महाराष्ट्र में जो किसान आंदोलन हुआ, ये सब 2-4 महीनों में अचानक से नहीं हुआ है. मेरे यह मानना है कि यह सब बहुत पहले से दबा हुआ था, जिसे हम देख नहीं पा रहे थे. कृषि में जो भी समस्या थी वो भयंकर रूप लेता जा रहा था और उसे कभी न कभी तो फटना था. ये जो गुस्सा इतने सालों से दबा हुआ था वो तो निकलना था और कैसे निकलेगा यह कोई बता नहीं सकता. हम कब तक किसी को दबा सकते हैं, एक न एक दिन उसे बाहर आना था. किसानों के आंदोलन का मुख्य कारण आर्थिक स्थिति है. हमे नहीं पता चलता क्योंकि हम शहर में रहते हैं. किसान जब आलू उगा रहा होता है या टमाटर की, सब्ज़ियों की पैदावार कर रहा होता है और जब फसल अच्छी होती है, उसके बाद जब मंडियों में उचित दाम नहीं मिलते तो वो क्या करे? जब उसको टमाटर के 30 पैसे किलो मिले या फिर 2 रुपये किलो मिले और आलू अब तक सड़...

माँ इंसान के जान की दुश्मन बन गई है?

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“है माँ अब तो बस तेरा ही सहारा है मैं जानता हूँ तुझमे देवताओ का वास है और तू जननी है लेकिन अब ये सब वास्तव में बर्दाश्त नहीं होता है”।पता है अब मेरे दोस्त भी कहने लगे है कि “आपकी माँ हमारी जान की दुश्मन बनी हुई है वो कहते है कि हम तो आपकी माँ से बहुत दूर रहने लगे है यहाँ तक कि वो तो आपको माँ भी कहने लगे है माँ उन्हें बहुत डर लगने लगा है” उन्होंने मुझे कुछ किस्से भी सुनाये है आप भी सुनो माँ। पता है माँ जब आपके कुछ बेटो ने नोएडा के “अखलाख” को मारा था तो उस समय उसका बेटा देश की रक्षा के लिए “भारतीय वायुसेना” का विमान उडा रहा था और आपके बेटो ने उसके पापा को मार डाला माँ उस समय पता है वो बहुत रोया था।एक दिन माँ एक बूढ़ा आदमी तेरे अमृत जैसे दूध के लिए तुझे ले जा रहा था रास्ते में फिर तेरे बेटो ने उसको पकड़ लिया माँ ये उसकी गलती थी कि वो तुझे रमजान के महीने में तेरे अमृत को अपने बच्चों को पिलाने के लिए खरीद कर लाया था और उसने कागज़ भी दिखाए लेकिन माँ तेरे बेटो ने उस बूढ़े को भी मार दिया और तू खामोश होकर अपने बेटो की करतूत देखती रही। एक दिन माँ एक औरत का बेटा अपने घर से दिल्ली गया था माँ अपने लिए ...

कागज का शेर बन गए हमारे प्रधानमंत्री

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- भरत तिवारी मोदीजी पिछले 3 साल से, जिस तरह कभी न खत्म होने वाले, एक के बाद एक, विदेशी दौरों पर हैं, मुझे अपने इलाहाबाद वाले मौसाजी याद आ गए, जब हम छोटे थे और गर्मियों की छुट्टी में वहां जाते थे तो अक्सर मौसाजी नहीं मिलते थे, वो ऑडिटर थे और ज्यादातर दौरे पर रहते थे। ऑडिटर का तो यही काम होगा...मगर हमारे प्रधानमंत्री कौन सी ऑडिट पर निकले रहते हैं, समझना अब ‘सच में’ बहुत मुश्किल हो गया है। अमरीका का उनका यह दौरा, इसके फायदे जिसको समझ आए होंगे, उम्मीद है, वह लिखेगा...तो हम भी पढ़ेंगे। मगर अभी तक जितना भी देखने में आया है, एक कॉमेडी मूवी की तरह ही है। ऐसा सिर्फ मुझे लग रहा होता तो मैं अपनी-समझ दुरुस्त कर सकता हूँ; लेकिन सोशल मीडिया को देखा जाए तो चुटकुलों की भरमार है। गंभीर बात है भारत जैसे विशाल देश का प्रधानमंत्री अमेरिका जाए और हाथ आए सिर्फ चुटकुले? दुखद है। ट्रम्प और मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय जो झप्पी डाली गयी उसमें कितना जादू था यह तो वक्त बताएगा, लेकिन ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ ने अपनी वेबसाइट पर 52 सेकेंड का जो — ट्रम्प एंड मोदी : अ टेंगो — शीर्षक वाल वीडियो डाला है उसमें — एक प्...

हिंदुस्तान बन रहा है किसानों का क़ब्रिस्तान ?

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राज्य बनने के बाद तेलंगाना में 3000, मध्य प्रदेश में 21 दिन में 40, मराठवाड़ा में दो हफ़्ते में 42 और छत्तीसगढ़ में एक पखवाड़े में 12 किसानों ने आत्महत्या की है. कृष्णकांत किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा बता पाना नामुमकिन है. हर रोज़ दर्जनों किसानों के आत्महत्या कर लेने की सूचनाएं आ रही हैं. हर दिन देश भर से इतनी सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं कि यह किसी तबाही से कम नहीं है. इतनी आत्महत्या की सूचनाओं को लेखा-जोखा रख पाना नामुमकिन है. पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, राजस्थान, पजांब और उत्तराखंड से दर्जनों किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें आई हैं. प्रदेश में जून महीने में ही आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 40 से ज़्यादा हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अलावा मध्य प्रदेश की विपक्षी पार्टी ने यह दावा किया है. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने दावा किया है कि जून महीने की शुरुआत से अब तक मध्य प्रदेश में 40 से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. लेकिन राज्य सरकार किसानों के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है. राज्य के सीहोर, होशंगाबाद, रायसेन, धार,...

कब्ज़े में भोले शंकर और भगवान विष्णु

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मोहम्मद जाहिद कैलाश मानसरोवर चीन में है , कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा रक्षातल झील हैं। यहां से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलतीं हैं - ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि। हिन्दू धर्म में इसे बेहद पवित्र माना गया है। हिंदुओं के लिए कैलाश मानसरोवर का मतलब भगवान का साक्षात दर्शन करना है। इस धर्म की मान्यता के अनुसार कैलाश मानसरोवर को ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार पहाड़ों की चोटी वास्तव में सोने के बने कमल के फूल की पंखुड़ियां हैं जिन्हें भगवान विष्णु ने सृष्टि की संरचना में सबसे पहले बनाया था। अर्थात भगवान विष्णु की पहली कृति। हिन्दू धर्म के अनुसार मानसरोवर झील में ही हिन्दू धर्म के भगवान विष्णु का वास है। इन पंखुड़ियों के शिखरों में ही एक है कैलाश पर्वत। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार इस पर्वत पर भगवान शिव ध्यान की अवस्था में लीन हैं और उनके इस अध्यात्म से ही चारों तरफ वातावरण बेहद शुद्ध है और कहा जाता है कि अपनी किरणों से उन्होंने पूरी सृष्टि को संतुलित रखा हुआ है। मान्यता है कि कैलाश पर्वत प...