मुसलमानों को देशद्रोही और आतंकी ऐसे कह देते हैं जैसे अनजानी लड़की को आई लव यू
अमन पठान
सब जानते हैं कि आतंकवाद का कोई मजहब नही होता है। आतंकवादी और देशद्रोही हर कौम की शक्ल में मिलते हैं। फिर भी मुसलमानों पर ही देशद्रोही और आतंकी की तोहमत लगाई जाती है। कुसूरवार वो नही हैं जो जरा जरा सी बात पर मुसलमानों को आतंकी, देशद्रोही करार दे देते हैं। असली कुसूरवार तो भारतीय मीडिया है जो तिल का तहाड़ बना देती है और मोदी सरकार बनने के बाद समाज में धर्म की नफरत घोलने का काम कर रही है।
बीते कुछ माह पूर्व मध्य प्रदेश में दर्जन भर भगवा आतंकी पकडे गए थे। जो आईएसआई के लिए काम करते थे। भाजपा और बजरंग दल से जुड़े होने के प्रमाण मिले थे। भारतीय मीडिया के लिए ये खास खबर नही थी। इसलिए मीडिया ने औपचारिकता निभाई। भारतीय मीडिया की नजर में असली आतंकी तो मुसलमान होते हैं। जब कोई मुसलमान आतंकी गतिविधि में पकड़ा जाता है तो मीडिया मामले को सनसनीखेज बनाकर दिनभर हंगामा करती है। चाहें पकड़े गए आतंकवाद के आरोपी को पुलिस बलि का बकरा ही क्यों न बना रही हो। मीडिया उसका शिज़रा तक प्रकाशित कर डालती है। मीडिया आतंकवाद के आरोपी को आरोपी नही आतंकी कहती है जैसे मीडिया के संपादक न्यायाधीश हों। मुस्लिम कौम से जुड़े मामलों में हिंदूवादी संपादक न्यायाधीश की भूमिका निभाने से नही चूकते हैं। तमाम ऐसे मामले हैं जिनमें मीडिया और पुलिस ने जिन्हें आतंकी करार दिया था। उन्हें अदालत ने बेकुसूर मानते हुए बाइज्जत रिहा किया।
वर्ष 2014 के बाद देशद्रोही और आतंकी शब्द आम बोल चाल में शुमार होने लगा। अब हालात ये हैं कि अगर देश के एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन एक नेता और यूपी के एक सत्ताधारी नेता को लेकर शत प्रतिशत कहने पर भक्त मुसलमानों को देशद्रोही आतंकी ऐसे कह देते हैं जैसे किसी अंजान लड़की को आई लव यू? अगर स्वीकार कर लिया तो ठीक नही तो हंगामा? आखिर ऐसा कब तक चलता रहेगा। सच कहते वालों पर कब तक आतंकी और देशद्रोही की तोहमत लगाई जाती रहेगी?

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