ईद आकर चली गई होली की तरह
जितेंद्र दीक्षित
ईद आकर चली गई। होली की तरह। सियासत को लेकर सांप्रदायिक खाई कितनी भी चौडी हो गई हो पर अभी भी त्यौहार जोड रहे हैं, एक-दूसरे को। तमाम मुसलमानों ने अपने हिंदू परिचितों से ईद की खुशियाँ साझा की।
मुजफ्फरनगर के पत्रकार शाहनवाज fb पर लिखते हैं-"ईदगाह से लौटा तो मोबाइल का मैसेज बाक्श लबालब था। हिंदू मित्रों की बधाई से।" कल चांद का दीदार होने के बाद हमने भी अपने तमाम फेसबुकियां मित्रों को शुभकामना दी। कानपुर का आतिफ असलम पत्रकार बनना चाहता था। उसे हिंदी पत्रकारिता में कोई गॉड फादर नहीं मिला। इन दिनों वह काम-धाम के सिलसिले में मुंबई रह रहा है। रमजान तक के लिए वह fb से दूर रहा।
आज ईद पर अपनी पिक के साथ नमूदार हुआ। मुझे दादू बोलता है सो ईद पर दावतनामा भेजा। ईद पर मेरे कानपुर न पहुंच पाने की माफी इस शर्त पर दी कि आगे जब भी घर में कोई कामकाज होगा तो आपको शिरकत करनी होगी। वह अक्सर खैरियत मालूम करता रहता है। आजमगढ के अब्दुल्ला आकिल आजमी के लिए ईद दोहरी खुशी लाई। पिछले साल शादी हुई थी और अब ईद से ठीक पहले 21 जून को बेटा हुआ।
आज उसने यह खुशखबरी यह कहते हुए साझा की-"इस बार ईद पर आप बाबा बन गए। लडके का जन्म हुआ है"। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। फतेहपुर के मोहम्मद तौसीफ ने भी ईद की खुशी साझा की। वह क्रिकेट में आगे बढना चाहता है। तौसीफ भी अक्सर सेहत के बारे में मालुमात करता है। मुजफ्फरनगर जिला पंचायत सदस्य अब्दुल्ला राणा ने भी गर्मजोशी से त्यौहार की खुशी साझा की। वरिष्ठ पत्रकार रियाज हाशमी की बधाई अभी-अभी मिली है। यही है हमारी हिंदुस्तानी तहजीब । तमाम बातों को दरकिनार कर हम आज भी सुख-दुख साझा कर रहे हैं। यही रवायत देश को मजबूत करती है।

Comments
Post a Comment