पुलिस और सत्ता के हिमायती झूठ को सच बना देते हैं?
अमन पठान
लखनऊ। कल रायबरेली के ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के गांव इटौरा बुजुर्ग में पुरानी रंजिश और वर्चस्व की जंग को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था। एक पक्ष को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। जान बचाकर भाग रहे लोगों की कार अनियंत्रित होकर पलट गई। मौके पर पहुंचे भाजपा नेता एवं उनके समर्थकों ने तीन लोगों की पीट पीटकर मार डाला और दो लोगों को कार सहित जिन्दा जला दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सच यही है।
पुलिस और सत्ता के हिमायती न्यूज़ संस्थानों ने खबर का रुख ही बदल दिया। इस हत्याकांड में मारे गए प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायत देवारा के ग्राम प्रधान रोहित शुक्ला सहित चार लोगों को बदमाश बना डाला। एक न्यूज़ वेबसाइट की खबर के मुताबिक कार सवार लोगों ने इटौरा बुजुर्ग की ग्राम प्रधान रामश्री के घर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। ग्रामीणों ने दौड़ाया तो वह कार लेकर भाग निकले और ग्रामीण अमृतलाल को टक्कर मारने के बाद उनकी कार विधुत पोल से टकरा गई। विधुत कार टूटकर कार पर गिर गया। जिससे कार में आग लग गई और कार में सवार पांच लोग जिन्दा जल गए।
अगर पांच लोग आग में जिन्दा जल गए तो इन तीन लोगों के जख्मी शव कार से बाहर कैसे आ गए। ये तीन लोग कार में जिन्दा क्यों नही जले। इनके कपड़े भी जले हुए दिखाई नही दे रहे हैं। एक सच ही है जिसे कितना भी छुपाओ वह सामने आ जाता है। मीडिया का ये झूठ का व्यापार अफसरों और सत्ताधारी नेताओं को तो खुश कर सकता है, लेकिन सच का जनाजा नही निकाल सकता। बताते चलें कि इस हत्याकांड में भाजपा नेता राजा यादव सहित 4 अन्य लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।



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