आनंदपाल के मारे जाने से राजस्थान का राजपूत समाज नाराज है?


एसपी मित्तल
राजस्थान के कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर को लेकर 27 जून को दिल्ली में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के एक प्रतिनिधि मंडल ने केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस मुलाकात में एडवोकेट ए.पी. सिंह भी शामिल थे। मुलाकात के बाद दावा किया गया कि एनकाउंटर पर राजनाथ सिंह ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
इधर नागौर के सांवरदा में आनंदपाल की माताजी निर्मल कंवर ने आमरण अनशन की धमकी दी है। आनंदपाल का शव अभी भी मुर्दाघर में ही रखा हुआ है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार अंतिम संस्कार करवाने के प्रयास कर रहे हैं। भीषण गर्मी में तीन दिनों तक शव को रखे रहने से डीडवाना क्षेत्र के हालात तनावपूर्ण है। परिजन एनकाउंटर के तरीके पर एतराज कर रहे हैं। हो सकता है कि आजकल में राज्य सरकार सीबीआई जांच का प्रस्ताव केन्द्र सरकार से कर दें। लेकिन केन्द्रीय गृहमंत्री के द्वारा राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब किए जाने से सवाल उठता है कि क्या आनंदपाल के मारे जाने से राजस्थान का राजपूत समाज नाराज है?
22 माह पहले फरारी के समय से ही आनंदपाल पुलिस के लिए सरदर्द बन गया था। पत्रकारों के सवाल पूछने पर सरकार को भी अपमानित होना पड़ता था। सरकार की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि अब तो मैं स्वयं आनंदपाल बन गया हूं। पुलिस ने आनंदपाल को पकडऩे के लिए उसकी गैंग से जुड़े 100 से भी ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी किया। यहां तक की दुबई में रह रही उसकी बेटी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सरकार विरोधी माहौल को देखते हुए पुलिस को उम्मीद थी कि आनंदपाल के एनकाउंटर पर उसे शाबासी मिलेगी।
यही वजह रही कि एनकाउंटर के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन जब एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे तो पुलिस का जोश ठंडा हो गया। राजपूत समाज से जुड़े अधिकांश संगठन आरोप लगा रहे हैं कि नागौर के एक मंत्री के इशारे पर आनंदपाल को मौत के घाट उतारा गया है। इस आरोप में कितनी सच्चाई है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन फिलहाल राजस्थान की पुलिस बचाव की मुद्रा में है। तेजी से बदलते हालातों में आनंदपाल के एनकाउंटर को जातीय राजनीति से जोड़ा जा रहा है। सरकार को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि हालात बिगड़े तो फिर नियंत्रण में करना मुश्किल होगा। सरकार को निर्मल कंवर की मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। 

Comments

Popular posts from this blog

अब आप को सेकेंड हैण्ड फोन लेने की जरूरत नहीं क्यों कि इतना सस्ता है शाओमी रेडमी का ये फ़ोन

शशि थरूर ने कहा मानसिक बीमारी बहुत जटिल होती है,मैं ऐसे व्यक्ति के साथ रह चुका हूँ

हजरत निजामुद्दीन दरगाह के सज्जादानशीं और उनके भतीजे आज सुरक्षित स्वदेश लौट आए