एटा-करोड़पति बाबू निलंबित, एफआईआर के आदेश
एटा- जिले के समाज कल्याण विभाग में तैनात रहे करोड़पति बाबू को शासन ने निलंबित कर दिया है। बाबू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के भी आदेश दिए गए हैं। जैथरा के आरटीआई एक्टविस्ट की शिकायत पर शासन ने कार्यवाही की है।
प्रदेश में योगीराज आते ही भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिले के समाज कल्याण विभाग तैनात रहे बाबू रामसिंह कश्यप विजीलेंस जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के दोषी पाए गए थे। विजीलेंस की कानपुर इकाई ने बाबू के खिलाफ फर्रुखाबाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। उस समय बाबू एटा जिले में ही तैनात था। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी बाबू पर कोई अनुशासनिक कार्यवाही नहीं की गई। जैथरा के आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार ने इसकी शिकायत शासन में कर दी। शिकायत पर कार्यवाही के नाम पर बाबू का ट्रांसफर मैनपुरी कर दिया गया और जांच डीआईजी, विजीलेंस लखनऊ को सौंप दी गई। कई महीनों तक बाबू पर कोई कार्यवाही न होने पर आरटीआई एक्टविस्ट ने शासन स्तर जांच के नाम पर बाबू को बचाने वाले अफसरों की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री से कर दी। शिकायत फाइलों में दबी रही और योगी सरकार बनते ही फाइलों में दबी शिकायत बाहर निकल आई। मुख्यमंत्री ऑफिस से बाबू को बचाने वाले अफसरों पर कार्यवाही के आदेश जारी कर दिए गए। जिसके बाद समाज कल्याण विभाग के अफसरों में हड़कम्प मच गया। विभागीय अफसरों ने खुद की गर्दन फंसती देख डीआईजी, विजीलेंस से तत्काल रिपोर्ट तलब कर ली। अकूत संपत्ति की पुष्टि होने पर बाबू को निलंबित कर दिया। निदेशक मनोज सिंह ने निलंबन आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी, मैनपुरी को बाबू के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के भी आदेश दिए हैं। निदेशक ने कार्यवाही रिपोर्ट शासन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है। बताते चलें कि बाबू रामसिंह कश्यप जिले के राजा का रामपुर का निवासी है। उसने फर्रुखाबाद के आवास विकास में आलीशान कोठी बनवा रखी है। एटा जिले में तैनाती के दौरान उसका समाज कल्याण विभाग में सिक्का चलता था। गैरजनपद तबादला होने के बाद भी उसका जिले से मोह नहीं छूट रहा था।
रिपोर्ट- सुनील कुमार, एटा

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