मुराद का आरोप सत्ता के दबाव में गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर किया



गणेश मौर्य

 अंबेडकर नगर अकबरपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन के पास  मुरादाबाद मोहल्ला के निवासी एवं समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मुराद अली पुत्र फतेह मोहम्मद को जिला अधिकारी अखिलेश सिंह ने गुंडा एक्ट के तहत 6 माह के लिए जिला बदर किया इस खबर को सुनते ही मुराद अली के पैरों तले जमीन खिसक गई  मुराद ने मीडिया को बताया कि प्रशासन हमारे साथ नाइंसाफी कर रही है 2013 में अकबरपुर कोतवाली में मामले थे मारपीट जान से मारने की धमकी छेड़खानी आपसी समझौता के बीच कोर्ट ने हमें क्लीन चिट दी मुराद अली ने प्रशासन को कोसते हुए कहा कि शासन-सत्ता के दबाव में पुलिस प्रशासन फर्जी  मनगढ़ंत तरीके से मेरे खिलाफ गुंडा एक्ट की रिपोर्ट तैयार करके जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दिया  जिसको देखते हुए जिला प्रशासन ने 6 महीने के लिए जिला बदर का आदेश भी सुना दिया मुराद ने कहा कि मैं एक समाज सेवी हूं मैंने हर संभव पीड़ितों की मदद की है हाल में ही एक लाख रुपया लाखों के जेवरात मुझे गिरा हुआ मिला जिसे मैंने प्रशासन को ईमानदारी के साथ वापस किया मैं


मुराद
दुख इस बात का है कि जब जिलाधिकारी ने गुंडा एक्ट की नोटिस जारी की उस समय समाजवादी की सरकार थी। समाजवादी सरकार से यह तात्पर्य बिल्कुल नही की अगर मैं दोषी होता तो मुझे सिर्फ समाजवादी पार्टी में सक्रियता के कारण सरकार से मदद की जाती । यहाँ मेरे कुछ प्रश्न है
मेरे विरुद्ध 5 मामलो को लेकर गुंडा एक्ट अधिनियम में मुकदमा चलाया गया जिनमे से 4 मामले असंज्ञेय यानी कि उनमें बिना न्यायालय की अनुमति के विवेचना ही संचालित नही हो सकती थी, और इन चारों मामलो में न्यायालय ने विवेचना की कोई अनुमति आज तक नही दी है।
पांचवा मामला भी न्यायालय द्वारा दोष मुक्त करते हुए खत्म किया जा चुका है।
मेरे ऊपर आरोप लगाया गया कि सड़क पे गुंडई करता हु, होटल मालिको को धमकाता हु , लड़कियों के साथ अभद्रता करता हु, परंतु मेरे विरुद्ध इन विषयों से संबंधित एक भी मामला पंजीकृत नही है।
अब न्यायिक समीक्षा का विषय यह था कि क्या कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध एक भी आपराधिक अभियोजन सिद्ध न हुआ हो क्या उसको जिला बदर करना न्यायोचित है, यह व्यक्ति के क्रोध को बढ़ावा देगा या शांत करेगा।
समाजवादी सरकार के मंत्री राम मूर्ति वर्मा के लिए मैंने तन, मन, और आय के शिमित श्रोत होने के बावजूद औकात से बाहर धन खर्च किया। उन्होंने न पुर्व में कोई सहायता की ना ही इस कमेंट को भेजने तक एक फ़ोन किया। दुख है

खैर मैं अपने और मित्रो  पे भरोषा रखता हूँ एक नही 100 बार " हम लड़ेंगे और जीतेंगे"

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