लोकतंत्र में भीड़तंत्र का अन्याय अब बर्दाश्त नही होता?
सुबह सुबह ऑंख खुली है तो मोदी जी के नये वाले हिंदोस्तान से एक और ख़बर आयी है
खट्टर के हरियाणा की है ये ख़बर, दिल्ली से लगभग 50 km की दूरी पर, चलती ट्रेन में ईद की ख़रीदारियों के लिये निकले लडकों पर चाकुओं से हमला.......एक की मौत बाकी घायल
ग़ुस्सा हूँ, ऑंखें नम हैं
लेकिन इस ग़ुस्से को फेसबुक पर नहीं दिखाऊँगा, इस ग़ुस्से को ऑंसुओं में पिरोकर आपको नज़्म भी नहीं सुनाऊँगा वरना अपने ही कुछ हरामख़ोर कहेंगे कि इमरान तो ऑंसू बेंचता है !
किसी मुस्लिम सियासत करते वाले नेता की बुराई भी नहीं करूँगा फेसबुक पर वरना लोग कहेंगे कि इमरान तो सियासत कर रहा है !
दो तीन दिन इंतज़ार करूँगा कि हमारे दुख को तक़रीरों में ढालकर वोट की भीख मॉंगने वाले क्या क़दम उठाते हैं, वरना फिर ख़ुद उतरूँगा मैदान में....जाऊँगा अवाम के दरवाज़े तक........लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध के लिये जगाऊँगा आपका ज़मीर और आपसे अपील करूँगा कि अब कोई मुस्लिम नेता ये कहता हुआ मिले कि मैं तुम्हारा मसीहा हूँ तो उसे भगा देना दुत्कार कर अपने इलाके से !
और हॉं दुनिया के तमाम मुल्कों में प्रायोजित भीड के साथ जाकर सेल्फ़ी लेने वाले प्रधानमंत्री जी
अगर आपको अपना वो बयान याद हो कि "रात के बारह बजे मेरे दरवाज़े मुसलमानों के लिये खुले हैं" तो हरियाणा के अपने मुख्यमंत्री से पूछिये कि उसके राज्य में ख़ूनी दरिंदे कब तक ये खेल खेलते रहेंगे !
मेरे तमाम ऑंसू इस मारे गये लडके के परिवार के साथ हैं
जानता हूँ कि अब इनके लिये ईद की ख़ुशियों के कोई मायने नहीं रह गये !
और शायद मेरे लिये भी !
ImraanPratapgarhi की फेसबुक वॉल से

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