जाते रमजान, राजधानी के नाम एक और तहरीर...
खान अशु
इस माह-ए-रमजान शहर-ए-भोपाल के नाम कुछ नायाब मामले जुड़ते गए, जिनसे हमारे इस शहर को न अलग पहचान मिली बल्कि हमने बाकी लोगों के लिए भी इबरत खड़ी कर दी है। इन मामलात की आखिरी कड़ी के रुप में एक कार्यक्रम रविवार की शाम होने वाला है।
'रोजा कुशाइ' के मायने, इसकी खुशियाँ और इससे जुड़े अहसासात सम्पन्न या माल-ओ-दौलत से लबरेज़ लोगों तक ही सिमटकर रह गए हैं। मालदार के बच्चों का पहला रोजा यानी पूरे शहर हन्गामा, बड़ी दावतें, बेहतरीन लजीज खाने और जमाने भर के तोहफे। जबकि गरीब के बच्चे कब बड़े होकर, कब पहला रोजा रख लेते हैं, उन्हें खुद ही पता नहीं चलता।
अमीर-गरीब के इस फासले को मिटाने और गरीब बच्चों को भी 'रोजा कुशाइ' का टेस्ट समझाने एक आयोजन रविवार शाम को होगा। राजधानी के श्यामला हिल्स इलाके में स्थित व्हाइट हाउस में आयोजित इस प्रोग्राम को मूर्तरुप देने वालों ने खुद को किसी तन्जीम के दायरे में भी कैद नहीं किया है। पहली बार हो रहे इस कार्यक्रम में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे बच्चों को शामिल किया जा रहा, जिन्होंने आज पहला रोजा रखा है। आयोजकों ने बताया कि इस दौरान रोजा रखे बच्चों को हार-फूल, नए कपड़ों, मिठाई के अलावा इनामात से नवाजा जाएगा।
अफतार बना पहचान
पहली बार शुरू किए गए 'अफतार सबके साथ' कार्यक्रम को राजधानी ही नहीं हिन्दुस्तान भर में पहचान और शानदार रिस्पान्स मिला है। बिना किसी व्यक्ति, समिती का नाम प्रचारित किए पूरा महीना सैकड़ों लोगों के लिए रोजा अफतार का अयोजन एक नायाब कदम है। इस दौरान इकबाल मैदान जैसे बड़े ग्राउन्ड को चन्द मिनटों में सफाई कर स्वच्छता अभियान की कड़ी से भी जोड़ा गया और इसका सफाई पसंदगी का इस्लामी पैगाम भी दिया गया।
कायम है गंगा जमनी तहजीब
हमिदिया मस्जिद को लेकर रमजान की शुरुआत में शहर में बने हालात ने एकबारगी सबको फिक्र में डाल दिया था त्यौहार पर अमन के दुश्मनों की नजर न लग जाए, लेकिन हालात जल्दी ही काबू हो गए और शहर एक बार फिर अपनी पुरानी चाल पर आ गया।

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